रविवार, 26 अप्रैल 2015

उल्टा चांद


पढ़े-लिखे वॉट्सऐपी-फेसबुकी-इंटरनेटी जमात के लिए चांद का मुंह टेढ़ा नहीं हुआ, बल्कि दिन के उजाले में ही चांद उलट गया। गोल-मटोल चांद ने पलटी कैसे मारी और पलटने पर उसके हाथ-पैर नीचे से ऊपर आए या ऊपर से नीचे? चांद का सिर कहां गया और पेट-पीठ का क्या हुआ? छोड़िए इन सब बातों को। यहां यह सब सोचने की फुर्सत किसे है? अभी तो हम अंडरग्राउंड वाटर में ज़हरीली गैस मिल जाने से हलकान हुए जा रहे हैं। गला सूख रहा है, लेकिन पानी पीने की हिम्मत नहीं हो रही। सीलबंद बोतल बगल में है, लेकिन इन कंपनियों का क्या भरोसा? क्या पता ज़हरीला पानी ही भर दिया हो? प्यास बुझाने के लिए जान थोड़े ही ना दे देंगे। वो तो भला हो छत्तीसगढ़ मौसम विभाग का जिसने वक्त रहते बता दिया कि 13.4 तीव्रता का भूकंप आने वाला है, नहीं तो बेमौत मारे जाते। अब भूकंप चाहे रात के 10 बजे आए या दो बजे, हम तो जगे ही रहेंगे।

अब तो नासा वालों ने भी कह दिया है कि प्रलय आने वाला है। देखा, हमारे छत्तीसगढ़ मौसम विभाग को! नासा से भी तेज़ गति है हमारी। वी आर प्राउड ऑफ बीईंग इंडियन! अच्छा चलो! गांधी मैदान चलो! जल्दी करो! रात में वहीं सोएंगे। मां-बाउजी को भी ले चलो। गद्दा ले चलते हैं ना। मच्छरदानी भी रख लेना। मच्छर काटेंगे तो लगा लेंगे। ऑडोमॉस तो ले ही लेना। क्या पता मच्छरदानी लगाने का जुगाड़ बने या ना बने! अच्छा तुम तैयारियां करो, मैं जरा दूसरे लोगों को भी मैसेज फॉरवर्ड कर देता हूं। उनकी जान भी बचानी है। अरे हां, आज रात साढ़े तीन बजे कॉस्मिक किरणें भी धरती के पास से गुजर रही हैं। अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ करके रखना, वरना ब्लास्ट हो सकता है। वो तो अच्छा हुआ वॉट्सऐप का कि सारी खबरें टाइम से मिल जाती हैं। वरना कब का राम नाम सत् हो जाता।

पप्पू भइया जाने कब से कह रहे थे कि अपने फोन में ही इंटरनेट लगवा लो। बड़े काम की चीज है। सारी जानकारी मिलती रहती है। आदमी अप-टू-डेट रहता है। कंप्यूटर में इंटरनेट हो तो कुछ पता नहीं चलता। जब तक लॉग इन करो, सिगनल मिले, साइट खोलो, तब तक तो जाने क्या से क्या हो जाता है। हम ही बुरबक थे, जो पप्पू भइया की बातों पर ध्यान नहीं दे रहे थे। लेकिन अब चिंता की कोई बात नहीं है। अब हम भी अप-टू-डेट रहते हैं। सारी जानकारी चकाचक मिलती रहती है। अब देखो काठमांडू के ओबेराय होटल के स्विमिंग पूल में सुनामी आई तो सबसे पहले मेरे ही पास वीडियो आया था। विशाखापत्तनम वाले गन्नू भैया ने भेजा था। मैंने ही यहां सारे मुहल्ले को फॉरवर्ड किया तब जाकर उनको पता कि भूकंप क्या चीज होती है, प्याले में तूफान ला देती है।

वॉट्सऐप पर हमने एक चीज सीख ली है। यहां फॉरवर्ड यहां रहना है तो फॉरवर्ड करना पड़ता है। फॉरवर्ड नहीं किया तो बैकवर्ड का ठप्पा लग जाएगा। कोई नई चीज आए तो उसे रोको मत। बस जाने दो। सबको बताने से ही उनका भला होगा। वैसे यहां भी बकैत कम नहीं हैं। जब देखो नुस्ख निकालते रहते हैं। सही-गलत का हिसाब बताते रहते हैं। वकालत सीखी नहीं, खुद को जज समझने लगते हैं। अरे, सही-गलत के चक्कर में पड़े रहेंगे तब तो किसी दिन अर्थी उठ जाएगी हमारी। और क्या हम ही हुए हैं फैसला करने वाले। और लोग नहीं है क्या? अरे भाई बता रहे हैं तो देख लो। मानना ना मानना तुम्हारी मर्जी। जय राम जी की। और हां, वो गोमांस के बिजनेस वाला मैसेज जो मैंने फॉरवर्ड किया था, उसे पढ़ा कि नहीं। फॉरवर्ड कर देना भइया। 15 ग्रुप में फॉरवर्ड करना है, तभी कृपा आएगी। जय राम जी की।

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